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December 12, 2025
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चुनावी घमासान – किसका होगा इम्तिहान? भिण्ड विधानसभा का जानिए पूरा समीकरण परानिधेश भारद्वाज के साथ

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं ऐसे में पार्टियां जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश में जी जान से जुटी हुई हैं और संभावित उम्मीदवार भी पुरजोर तरीके से अपनी-अपनी दावेदारी में जुटे हुये हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों में दोनों ही पार्टियां कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहतीं। भिण्ड में मध्यप्रदेश की तरह भाजपा एवं कांग्रेस का ही बोलबाला है, इसके साथ ही भिण्ड जिले में पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश की राजनीति की हवा भी चलती रहती है जिसके चलते बसपा और सपा भी रूठों का सहारा बन जाते हैं और पाशा पलटने में अच्छी खासी भूमिका निभाते हैं।
तो आइए जानते हैं भिण्ड के समीकरण…

1990 के बाद के इतिहास पर गौर करें तो भिंड विधानसभा में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, डॉ राम लखन सिंह, नरेंद्र सिंह कुशवाह और इस बार डॉ राम लखन सिंह के सुपुत्र संजीव सिंह कुशवाह के हाथों में ही विधानसभा की चाबी रही है। सीधे-सीधे कह सकते हैं कि पिछले 33 वर्षों में डॉ रामलखन सिंह कुशवाह, नरेंद्र सिंह कुशवाह और राकेश चौधरी परिवार के बीच में ही भिण्ड विधानसभा की कुर्सी घूमती रही है। लेकिन इस बार भिंड विधानसभा में नवयुवकों की फौज भी खड़ी हो गई है जो हर हाल में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। कई नवयुवक भाजपा से तो कई कांग्रेस से टिकट की दावेदारी में लगे हुए हैं, जबकि कुछ बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी से भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। यही नहीं यह नवयुवक इस बार विधानसभा क्षेत्र में जी तोड़ मेहनत करने में भी लगे हुए हैं। वह अपनी जमीन तैयार करने में जी जान से जुटे हुए हैं। वहीं महिला शक्ति को भी नकारा नहीं जा सकता और वह भी विधानसभा टिकिट की फ्रंट लाइन में खड़ी हैं।


ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टियां पुराने चेहरों पर ही दाव लगातीं हैं या फिर नए चेहरों को भुनाने की कोशिश करती हैं। हालांकि कुछ एक अपवादों को छोड़ दें तो जो भी सर्वे हुए हैं उनमें पुराने चेहरों को ही तवज्जो दी गई है। लेकिन पार्टियों ने अगर सर्वे में नए चेहरों को जगह दी होती तो निश्चित तौर पर वह आगे आते। जनता भी बदलाव के मूड में है और इसी बदलाव की चाह में पिछली बार संजीव सिंह कुशवाह को रिकार्ड मतों से जितवाया था। हालांकि संजीव सिंह कुशवाह अभी भी युवा चेहरे में शामिल हैं लेकिन जनता अब भी अब इन सभी से अलग चेहरा चाहती है।

भिण्ड में सभी विधायक पूर्व विधायक अपनी पार्टी से बागी!
भिण्ड विधानसभा में इस समय सभी नेता चाहे विधायक या पूर्व विधायक हों सभी दलबदलू नेता ही हैं। भिण्ड विधानसभा में नेताओं के दल बदलने की कहानी से आपका सिर ही चकरा जाएगा कि आखिर कौन किसका भरोसेमंद है भी अथवा नहीं। यहां पर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से बगावत कर बसपा की टिकट पर चुनाव लड़े संजीव सिंह कुशवाह ने भारी मतों से जीत हासिल की थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता और उपनेता प्रतिपक्ष रहे चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी पिछली बार यहां पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे जो कि दूसरे नंबर पर रहे। जबकि तत्कालीन भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को टिकिट ना मिलने पर उन्होंने भाजपा से बगावत कर समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और भाजपा उम्मीदवार से थोड़ा ही पीछे रहे। पिछले चुनाव में बसपा से जीते संजीव सिंह कुशवाह वापस भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में यहां पर दिलचस्प रहेगा कि आखिर बीजेपी किसको टिकट देती है और कौन फिर से बगावत करता है?


इस बार भी यहां टिकिटों पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कौन किस पार्टी से उम्मीदवार बन जाये यह कहना मुश्किल है, क्योंकि दोनों धुर विरोधी एक ही पार्टी में हैं। जबकि राकेश चौधरी की भिण्ड में तो अच्छी खासी धाक है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी उनकी योग्यता का लोहा मानते हैं। वह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं और पार्टी में अच्छी खासी पेठ भी रखते हैं। लेकिन फिर भी पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र की हठधर्मिता के चलते उनका विरोध भी कांग्रेस में है। इसके साथ ही कुछ कांग्रेसियों को लगता है कि चौधरी राकेश सिंह के कांग्रेस में रहने के चलते उनकी दाल नहीं गल सकती। ऐसे में वह उनका पुरजोर विरोध करते हुए इस कोशिश में लगे हुए हैं कि भिंड से चौधरी राकेश सिंह को टिकट न मिले। लेकिन भिंड विधानसभा में उनके अलावा कांग्रेस के पास उनके समकक्ष कोई चेहरा नहीं है। यह जरूर है कि कांग्रेस युवा नेताओं पर दाव लगाये।


कांग्रेस में युवा नेताओं की बात की जाए तो यहां पर सबसे ज्यादा सक्रियता इस समय डॉ गोविंद सिंह के करीबी धर्मेंद्र सिंह भदोरिया उर्फ पिंकी की है। पिंकी की छवि एक बेहद ही साफ-सुथरी और सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित है। वह पिछले लंबे समय से जिला पंचायत सदस्य रहे हैं। उनकी छवि किसी जाति वर्ग विशेष के नेता की नहीं बल्कि एक सर्व मान्य नेता के रूप में है। पिंकी भदौरिया के पास युवाओं की फौज के साथ ही उनके ऊपर वरिष्ठ जनों का हाथ भी है। ऐसे में वह भी टिकिट के दावेदारों में ऊपरी पायदान पर हैं। इसके अलावा कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष संदीप मिश्रा भी क्षेत्र में पसीना बहा रहे हैं। वहीं युवाओं की बात करें तो युवा नेता राहुल सिंह कुशवाह भी खासे सक्रिय थे लेकिन हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। वही चौधरी राकेश सिंह के सुपुत्र भरत सिंह चतुर्वेदी भी कांग्रेस से टिकिट की दौड़ में हैं।


भाजपा की बात करें तो यहां पर एक दूसरे के धुर विरोधी पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह एवं वर्तमान विधायक संजीव सिंह कुशवाह दोनों ही इस समय भाजपा में हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि पार्टी किसको अपना मैंडेट देगी। लेकिन दोनों ही नेता जमीनी स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं के बीच जमकर पसीना बहा रहे हैं। वहीं भाजपा में भी युवाओं को आगे लाने की बात कही जा रही है। युवा नेताओं की बात करें तो यहां पर पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे एडवोकेट अर्पित मुदगल भी लगातार भाजपा नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं भाजयुमो के पूर्व जिला अध्यक्ष कमल शर्मा भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं। यही नहीं भाजपा के युवा नेता विश्व प्रताप सिंह राजावत उर्फ विष्णु का नाम युवा नेताओं में ऊपरी पायदान पर है। इसके साथ ही जैन समाज से भी ओमप्रकाश अग्रवाल बाबूजी एवं रसाल सिंह भी भाजपा से टिकिट लेकर चुनाव लड़ने का मन बनाये हुए हैं।

बागी बिगाड़ेंगे समीकरण!
हालांकि भिंड में दबदबा तो बीजेपी और कांग्रेस का ही रहता है लेकिन इनके बागी बसपा और सपा से टिकट लेकर दोनों ही पार्टियों का खेल बिगड़ने में पीछे नहीं हटते। पिछली बार संजीव सिंह कुशवाह ने भाजपा से बगावत कर बसपा से टिकट लिया और बंपर जीत हासिल की तो वहीं नरेंद्र सिंह कुशवाह ने भी सपा से चुनाव लड़ा, जबकि दोनों ही भाजपा नेता थे। जबकि कांग्रेस से उप नेता प्रतिपक्ष रहे और कैबिनेट मिनिस्टर रहे चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी भाजपा से चुनाव लड़े थे।


एक बार फिर यहां पर भाजपा से असंतुष्ट दूसरे दल से चुनाव लड़कर भाजपा का गणित जरूर बिगाड़ सकते हैं। भाजपा से असंतुष्ट युवा नेता रक्षपाल सिंह राजावत ने पहले ही बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है और सक्रियता से प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी से भी इस बार टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त है। यहां पर पहले चुनाव लड़ चुके साकेत सक्सेना आम आदमी पार्टी से उम्मीदवार हो सकते हैं तो वहीं सेना से रिटायर होकर जनसेवा की भावना लेकर आगे बढ़ रहे जयदीप सिंह राजावत उर्फ फौजी सरकार भी आम आदमी पार्टी से टिकट की अपेक्षा लगाए हुए मैदान में जमकर पसीना बहा रहे हैं। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी जिला अध्यक्ष अरविंद जोशी भी टिकट की चाहत बनाए हुए हैं।

युवा नेताओं का कहना- जरूर लड़ेंगे चुनाव
लंबे समय से पार्टियों से जुड़कर कार्य कर रहे युवा नेताओं का कहना है कि वह इस बार चुनाव जरूर लड़ेंगे, चाहे पार्टी उन्हें मैंडेट दे या ना दे। अगर पार्टी उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाती है तो वह निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना है कि भिंड विधानसभा कुछ परिवारों के बीच ही सिमट कर रह गई है और यहां पर एक नए नेतृत्व की जरूरत है, ताकि क्षेत्र का विकास हो सके। ऐसे में विकास के मुद्दों को लेकर वह चुनाव में जरूर उतरेंगे।
अगर एक साथ इतने युवा चुनाव में उतरे तो मतदाता के लिए भी बेहद ही असमंजस की स्थिति रहेगी।


सबसे बड़ी बात भाजपा में है कि यहां पर भाजपा के पुराने नेता नरेंद्र सिंह कुशवाह और संजीव सिंह कुशवाह जहां टिकट के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं तो वहीं इन दोनों से अलग युवा नेता अर्पित मुदगल ने भी भिण्ड विधानसभा से टिकट की मांग की है। इसके लिए वह भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से भी मिल चुके हैं। सूत्रों की मानें तो हाल ही में जन आशीर्वाद यात्रा में दोनों भाजपा नेताओं की एक दूसरे के प्रति स्थिति देखकर भाजपा किसी तीसरे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने के मूड में है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दोनों वर्तमान दिग्गजों को छोड़कर भाजपा किसी तीसरे कार्यकर्ता को टिकट देकर अपना उम्मीदवार बना दे।


महिलाओं को भी मिल सकता है मौका
महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद अब कई सीटों पर महिलाएं ही चुनावी मैदान में नजर आएंगीं। ऐसे में भिंड में अगर बात की जाए तो यहां पर भाजपा से कृष्णकांता तोमर और कांग्रेस से रेखा भदोरिया के नाम सबसे ऊपर हैं। हालांकि कई नेता अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ाने के प्रयास में रहेंगे, लेकिन सक्रिय महिला नेताओं की बात की जाए तो यही दोनों नाम सबसे ऊपरी पायदान पर हैं।

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