परानिधेश भारद्वाज,
उल्टा चोर कोतवाल को डांट वाली कहावत भिण्ड में उस समय चरितार्थ हो गई जब एक ठेकेदार को गलत काम करनी रोकने पर ठेकेदार द्वारा समाजसेवी नेता पर ही एफआईआर दर्ज करा दी गई। ठेकेदार द्वारा नाली का पानी गौरी सरोवर में मिलाएं जाने के लिए सड़क खोदकर पाइप डाला जा रहा था, जिसका विरोध करना रक्षपाल को भारी पड़ गया।
दरअसल किसी भी जलस्रोत में गंदे पानी को डाल जाना एनजीटी की तरफ से पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके ठेकेदार द्वारा केवल मौखिक निर्देश पर गंदे पानी को गौरी में छोड़ने के लिए मोटे मोटे पाइप सड़क खोदकर बिछाए जा रहे थे। इसी दौरान समाजसेवी नेता रक्षपाल सिंह वहां से गुजरे। जब उन्होंने गौरी में नाला मिलाया जाते देखा तो इसका विरोध शुरू कर दिया। जब ठेकेदार नहीं माना तो रक्षपाल ने विरोश स्वरूप एक पत्थर उठाकर पाइप पर दे मारा जिससे पाइप टूट गया। अब चूंकि वर्तमान विधायक और रक्षपाल सिंह के बीच पहले से ही ठनी हुई है तो रक्षपाल सिंह पर एफआईआर में बिल्कुल देरी नहीं हुई। बड़े बड़े क्राइम में इतनी चुस्ती एफआईआर दर्ज करने में नहीं दिखाई जाती जितनी रक्षपाल सिंह पर एफआईआर दर्ज कराने में दिखाई गई। उसमें भी बढ़ा चढ़ाकर बताया गया कि रक्षपाल ने ठेकेदार को जान से मारने की धमकी भी दे दी।
यहां सबसे बड़ा सवाल है कि रक्षपाल केवल नाली गौरी में मिलाएं जाने का विरोध कर रहे थे, भला जान से मारने की धमकी कहाँ से आ गई? खैर यह भिण्ड है यहां कुछ भी संभव है। अब रक्षपाल सिंह और भी आक्रामक हो गए हैं और उनका कहना है कि वह गौरी में गंदे नालों को नहीं मिलने देंगे। गौरी सरोवर प्राचीन समय से ही लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और इसके किनारे पर बड़ी संख्या में मंदिर मौजूद हैं। ऐसे में वह आस्था से खिलवाड़ किसी को नहीं करने देंगे।

