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June 17, 2026
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दलितों के मसीहा थे बाबू जगजीवन राम जी- त्रिपाठी


बुद्ध मुस्कुराए सेवा संघ द्वारा चंदनपुरा के अटेर रोड पर दलितों की मसीहा पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 36 वी पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर कांग्रेस अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पान सिंह जाटव ने की।
कार्यक्रम में बोलते हुए नगर कांग्रेस के अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी ने कहा बाबूजी ने दिसंबर 1885 में बनी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपनी माँ के समान बताया है व इसकी सेवा में सदैव आगे रहे। बाबूजी वर्ष 1937-77 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे। स्वतन्त्रता प्राप्ति उपरान्त वे कांग्रेस के लिए अपरिहार्य हो गए थे। बाबू जगजीवन राम महात्मा गांधीजी के प्रिय तो थे ही साथ ही पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी के सबसे अहम सलाहकारों में से भी एक थे। वर्ष 1966 में माननीय डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद जी के निधनोपरांत कांग्रेस पार्टी का आपसी मतभेदों व सत्ता की लड़ाई के कारण बंटवारा हो गया। जहां एक तरफ नीलम संजीवा रेड्डी, मोरारजी देसाई व कुमारसामी कामराज जैसे दिग्गजों ने अपनी अलग पार्टी की रचना की वहीं श्रीमती इन्दिरा गाँधी, बाबू जगजीवन राम व फकरुद्दीन अली अहमद जैसे आधुनिक सोच के व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहे। वर्ष 1969 में बाबूजी निर्विरोध कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में स्वीकारे गए व बाबूजी ने पूरे देश में कांग्रेस पार्टी को मज़बूत करने व उसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पूर्ण प्रयास किया। जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी 1971 के आम चुनावों में ऐतिहासिक व प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौट आई। श्रीमती इन्दिरा गांधी ने इस ऐतिहासिक घटना का श्रेय बाबूजी को देते हुए कहा – “बाबू जगजीवन राम भारत के प्रमुख निर्माताओं में से एक हैं। देश के करोड़ों हरिजन, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक लोग उन्हें अपना मुक्तिदाता मानते हैं”।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पान सिंह जाटव ने कहा बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक जीवन का आगाज़ कलकत्ता से ही हुआ। कलकत्ता आने के छः महीनों के भीतर ही उन्होंने विशाल मजदूर रैली का आयोजन किया जिसमें भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। इस रैली से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी को भी बाबूजी की कार्यक्षमता व नेतृत्वक्षमता का आभास हो गया था। इस काल के दौरान बाबूजी ने वीर चन्द्रशेखर आज़ाद तथा सिद्धहस्त लेखक मन्मथनाथ गुप्त जैसे विख्यात स्वतंत्रता विचारकों के साथ काम किया। वर्ष 1934 में जब सम्पूर्ण बिहार भूकंप की तबाही से पीड़ित था तब बाबूजी ने बिहार की मदद व राहत कार्य के लिए अपने कदम बढ़ाए। बिहार में ही पहली बार उनकी मुलाकात उस काल के सबसे महत्त्वपूर्ण, प्रभावशाली व अहिंसावादी स्वतंत्रता सेनानी माननीय श्री मोहन दास करमचन्द गाँधी अर्थात् महात्मा गाँधी से हुई। महात्मा गाँधी ने बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक जीवन में एक बहुत अहम भूमिका निभाई।

इस कार्यक्रम का संचालन अनिल जाटव जी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सुनील कांकर, मुकेश गर्ग, राजेंद्र पाठक, सतवीर कमल, अशोक पटवारी, कुलदीप भारद्वाज, राहुल निवारी, सुनील पवैया, मायाराम हलवाई, राजकुमार कमल, मुनेंद्र पाठक, कमलेश नर्वस, छोटे जारी, दुर्गेश बलोठिया, शुभम दुबे, दीपू बोहरे, शिवम शर्मा आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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