परानिधेश भारद्वाज,
भिंड। ग्वालियर-भिंड नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर संत समाज और समाजसेवी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। इस संबंध में 27 अक्टूबर को उमरी क्षेत्र स्थित त्रिमूर्ति धाम देवगढ़ में बड़े आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा। संत समाज ने आमजन, पूर्व सैनिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

गौरमी में आयोजित संत सभा में अखिल भारतीय संत समिति के जिला अध्यक्ष संत कालीदास महाराज ने कहा कि ग्वालियर-भिंड हाईवे के मुद्दे पर सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने मंत्री राकेश शुक्ला द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए पत्र को भ्रामक बताते हुए कहा कि उसमें 16 मई को टेंडर जारी होने का दावा किया गया है, जबकि बाद में स्वयं एनएचएआई द्वारा 13 अक्टूबर और अब 29 अक्टूबर की नई तिथियों का उल्लेख करते हुए पत्र जारी किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जनता को गुमराह किया जा रहा है।
संत कालीदास महाराज ने कहा कि संत समाज ने अब तक शालीनता और धैर्य का परिचय दिया, लेकिन यदि इसे उनकी कमजोरी समझा जा रहा है तो अब आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और भिंड के सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों पर होगी।
वहीं फूफ में अपने अनुयायियों के साथ चर्चा के दौरान त्रिमूर्ति धाम के पीठाधीश्वर डॉ. शिवप्रताप महाराज ने कहा कि सरकार के पास अब केवल 15 दिन का समय है। उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन “आर या पार” की लड़ाई होगा और 27 अक्टूबर से शुरू होने वाला विरोध प्रदर्शन आगामी चुनाव तक जारी रह सकता है।
संत समाज ने बताया कि यह आंदोलन संत कालीदास महाराज एवं संत श्री हरिनिवास अवधूत जी महाराज के नेतृत्व में संचालित किया जाएगा। सभी संतों ने क्षेत्र के नागरिकों, पूर्व सैनिकों, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से 27 अक्टूबर को त्रिमूर्ति धाम देवगढ़, उमरी पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

