परानिधेश भारद्वाज,
भिण्ड। काशी धर्म पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज गुरुवार शाम को दो दिवसीय प्रवास पर भिंड के परा गांव में स्थित अमन आश्रम पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके शिष्यों ने पहुंचकर शंकराचार्य जी का स्वागत पूजन वंदन अभिनंदन किया।
शुक्रवार को पूजन के उपरांत शंकराचार्य महाराज ने शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा कि इस सृष्टि में परमपिता परमेश्वर ही एकमात्र सत्य है और हम सभी के अंदर वह विद्यमान है। अल्प समय के लिए यह शरीर मिलता है ऐसे में लोगों को एक दूसरे से लड़ाई झगड़ा ना करते हुए प्रेम पूर्वक ईश्वर आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीर तो एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा, लेकिन आपका व्यवहार ही है जो हमेशा याद रखा जाएगा। ऐसे में हमें सभी के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए। किसी से ईर्ष्या, द्वेष, बैर का भाव नहीं रखना चाहिए इससे आपके अंदर ही अशांति पैदा होती है। और अशांति के कारण ही शरीर को विभिन्न प्रकार के रोग जकड़ लेते हैं क्योंकि आपके मस्तिष्क में जब तक ईर्ष्या, द्वेष, बैर के चलते अशांति रहेगी तब तक शरीर भी सुखी नहीं रह सकता। क्योंकि मस्तिष्क ही सारे शरीर को नियंत्रित करता है। ऐसे में हमें शांत चित्त रहना चाहिए। शांत चित्त वाले मनुष्य को रोग नहीं घेर सकते। उसका मस्तिष्क भौतिकता में ना पड़ते हुए ईश्वर आराधना में आसक्त रहता है। इसीलिए सभी को ईर्ष्या, द्वेष, बैर भाव का त्याग कर देना चाहिए।
शंकराचार्य ने जानकारी देते हुए बताया की परा गांव स्थित अमन आश्रम धर्म एवं सनातन साधना का केंद्र बनेगा। जिससे आसपास के क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा। इसका बहुत ही तेज गति से निर्माण कार्य चल रहा है ताकि यहां आने जाने वाले लोगों को असुविधा न हो।
आपको बता दें कि शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के देश नहीं विदेशों में भी बड़ी संख्या में अनुयाई हैं और उनके प्रवास के दौरान दूर-दूर से शिष्य शंकराचार्य जी महाराज के दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसे में उनके रहने खाने की व्यवस्था भी आश्रम में ही की जायेगी। शंकराचार्य जी शनिवार को 10:30 बजे भिंड के परा गांव स्थित अमन आश्रम से प्रस्थान कर ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां से वह आगामी सत्संग कार्यक्रम के लिए मुंबई के लिए प्रस्थान करेंगे।

