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February 11, 2026
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सिंध नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से खुली अवैध उत्खनन और परिवहन की पोल, आधा सैकड़ा से अधिक ट्रक फंसे तेज बहाव में

परानिधेश भारद्वाज

सिंध नदी में अचानक से बढ़ा जलस्तर

अवैध उत्खनन और परिवहन में लगे वाहन फंसे तेज बहाव में

ड्राइवरों ने रस्सी के सहारे निकलकर बचाई अपनी जान

बारिश के मौसम में प्रतिबंध के बावजूद नदी के अंदर से चल रहा था अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में चल रहे अवैध उत्खनन और परिवहन की पोल उस समय खुली जब बुधवार को सिंध नदी में एकाएक तेज पानी आ गया और यहां पर बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। इसके चलते सिंध नदी के अंदर से रेत भर रहे ट्रक एवं डंपर तेज पानी के बहाव में फंस गए। जिसके बाद कई ड्राइवरों ने तो वाहनों से कूदकर रस्सी के सहारे बाहर निकल कर अपनी जान बचाई। ऐसे में अब प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि पूरा प्रशासनिक अमला त्रिस्तरीय पंचायत और नगरी निकाय चुनावों में व्यस्त था ऐसे में इसका पूरा फायदा रेत उत्खनन में लगी कंपनी शिवा कॉर्पोरेशन ने उठाया और जमकर नदी से रेत का अवैध उत्खनन किया।

एनजीटी के प्रतिबंधों के बावजूद भी जिले में किस प्रकार से अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब ग्वालियर चंबल अंचल में हुई तेज बारिश के बाद सिंध नदी में एकाएक पानी आ गया। जिसके चलते रेत भरने के लिए खड़े ट्रक और डंपर नदी के बहाव में आ गए। वाहनों को डूबता देख ड्राइवर अपनी जान बचा कर वाहन छोड़कर भाग खड़े हुए।

यह स्थिति तब है जबकि 30 जून से वर्षा काल को देखते हुए एनजीटी के आदेशों का हवाला देकर कलेक्टर द्वारा रेत के उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस दौरान केवल पहले से अनुमति लेकर भंडारित किए गए रेत के स्टॉक को ही बेचा जा सकता है। लेकिन वर्षा काल से कुछ ही समय पूर्व खनन शुरू करने वाली शिवा कॉरपोरेशन ने एनजीटी और कलेक्टर के आदेशों को धता बताते हुए नदी के अंदर से अवैध रूप से रेत का उत्खनन जारी रखा।

कुछ दिनों पूर्व भी लहार क्षेत्र की पर्रायंच खदान पर अवैध उत्खनन के वीडियो वायरल हुए थे। लेकिन प्रशासन द्वारा अवैध उत्खनन की बात को नकारते हुए कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई थी। लेकिन इसकी पोल उस समय खुली जब बुधवार को नदी में अचानक से पानी बढ़ गया। आधा सैकड़ा से अधिक ट्रक डंपर नदी के अंदर ही फंस गए। जबकि बड़ी संख्या में वाहन नदी के बाहर भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

रेत माफियाओं द्वारा भी पुलिस प्रशासन की नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में संलिप्तता का जमकर फायदा उठाया जा रहा था। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसी नदी पर बने पांच बड़े पुल पिछले साल आई तेज बाढ़ में कागज की तरह बह गए थे। ऐसे में अगर इतनी ही तेजी से पानी अभी नदी में आ गया तो ये ट्रक कहाँ जायेंगे।

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