परानिधेश भारद्वाज,
यदि भारतीय सभ्यता और धरोहर को बचाना है तो यह संस्कारों के द्वारा ही संभव है। बिना संस्कार के बच्चे पूर्णत: खोखले रह जाते हैं, उनका सिर्फ भौतिक विकास होता है और अंतर्मन कमजोर रह जाता है। उक्त कथन भारत विकास परिषद महिला शाखा जागृति द्वारा आयोजित गुरु वंदन छात्र अभिनंदन कार्यक्रम में स्थानीय संस्कृति विद्यालय में सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापिका, वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यकार श्रीमती आशा भदौरिया ने मुख्य अतिथि के तौर पर कहीं। उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद द्वारा चलाए जा रहे इस प्रकल्प से निश्चित ही बच्चों में एक दूसरे से बेहतर बनने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि वही संगठन उत्कृष्ट है जो सुपंथ के मार्ग पर कार्य करता चले।

इसी क्रम में शाखा अध्यक्ष निशी गुप्ता ने बच्चों को प्रेरणा देते हुए गुरुओं का सम्मान करने की सीख दी एवं माता-पिता का आदर करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य भाग में संस्था के 6 छात्रों को मेडल एवं प्रमाण पत्र के साथ सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शाखा परिवार से संगीता कौशल, संजीव गुप्ता, शाखा संस्थापक अरुणा पाठक, देवकांत बरुआ उपस्थिति रहे।
कार्यक्रम में सार्थक जैन, विष्णु भदौरिया, आराध्या मौर्य, हर्ष प्रताप सिंह, नैतिक भदौरिया, आयुष दुबे का सम्मान किया गया। साथ ही शिक्षक सम्मान के लिए दो उत्कृष्ट शिक्षक प्रद्युमन सिंह भदौरिया एवं रंजना ओझा का चयन कर मनोनीत किया गया।


