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August 10, 2026
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फर्जी दस्तावेज के आधार पर पीएमटी पास कर डॉक्टर बने आरोपी को एसटीएफ कोर्ट ने सुनाई सजा

परानिधेश भारद्वाज,

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पदस्थ एक डॉक्टर को एसटीएफ कोर्ट भोपाल द्वारा तीन अलग-अलग धाराओं में तीन-तीन सालों की सजा, जबकि एक धारा में 2 साल की सजा एवं पांच पांच-पांच सौ रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया गया है। आरोपी डॉक्टर सीताराम शर्मा द्वारा फर्जी मूल निवासी सर्टिफिकेट लगाकर एमबीबीएस की सीट में मध्य प्रदेश कोटे से एडमिशन लिया गया था, जिसकी शिकायत वर्ष 2009 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा की गई थी।

दरअसल वर्ष 2009 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा कहा गया था कि व्यापम द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षाओं में वर्ष 2006 के बाद बड़े स्तर पर घोटाले हुए हैं जिनमें अन्य प्रदेशों से आए कुछ छात्रों द्वारा फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र लगाकर भी मध्य प्रदेश के कोटे से मेडिकल सीटों पर एडमिशन लिए गए हैं। राज्यसभा सांसद की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ द्वारा एसआईटी गठित कर जांच की गई और शिकायत सही पाए जाने पर उत्तरप्रदेश के रहने वाले आरोपी डॉक्टर सीताराम शर्मा पुत्र नत्थीलाल शर्मा के खिलाफ वर्ष 2009 में एसटीएफ द्वारा भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच प्रारंभ की गई। मामला एसटीएफ कोर्ट में पहुंचा जहां पर इसकी सुनवाई की गई। मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ भोपाल अकील खान एवं सुधा विजय सिंह भदौरिया द्वारा की गई। जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना द्वारा आरोपी डॉक्टर को दोषी करार देते हुए धारा 420, 467 एवं 468 में 3-3 वर्ष के कारावास एवं धारा 471 में 2 वर्ष के कारावास एवं पांच-पांच सौ रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया।

आरोपी डॉ सीताराम शर्मा मूलतः उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के फतेहाबाद का रहने वाला था। जिसने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह तहसील का मूल निवासी प्रमाण पत्र एमबीबीएस की सीट पाने के लिए लगाया था। लेकिन जब तत्कालीन सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा इसकी शिकायत हुई तो डॉक्टर सीताराम शर्मा द्वारा लगाए गए मूल निवासी का कोई रिकॉर्ड सरकारी दफ्तर में दर्ज नहीं मिला। जबकि उसने दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं उत्तरप्रदेश से ही पास की थीं। ऐसे में विशेष लोक अभियोजक अकील खान एवं सुधा विजय सिंह भदौरिया द्वारा की गई पैरवी से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा दी गई।

न्यायालय के निर्णय के पैरा 143 में लेख किया गया है विद्वान विशेष लोक अभियोजक ने मामले की पृष्ठ भूमि पर प्रकाश डालकर यह प्रकट किया कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध इसलिए गंभीर प्रकृति का है क्योंकि मध्यप्रदेश का मूल निवासी ना होकर एक प्रतियोगी परीक्षा में अवास्तविक कूटरचित दस्तावेज का उपयोग कर बेईमानी से स्थान सुनिश्चित किया गया। जिससे वास्तविक प्रतियोगी परीक्षार्थी का अधिकार प्रभावित हुआ है। वर्तमान में अभियुक्त एक शासकीय चिकित्सालय में एक चिकित्सीय अधिकारी है। इसलिए अभियुक्त का अपराध गंभीर प्रकृति का होकर अभियुक्त को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने की प्रार्थना की गई।

मामले में जब भिण्ड सीएमएचओ डॉ जेएस यादव से बात की गई तो उनका कहना है कि अगर किसी डॉक्टर को सजा हुई है तो शासन द्वारा प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जायेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी डॉक्टर की वर्तमान पोस्टिंग भी भिण्ड जिले के अटेर क्षेत्र के कनेरा गांव में है। जो कि चंबल नदी किनारे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बॉर्डर पर स्थित है और यहां से आरोपी डॉक्टर का मूल निवास भी नजदीक ही है।

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